जो ये जान जाएगा वो रिश्तों में कभी धोखा नहीं खाएगा आचार्य प्रशांत, बातचीत (2022)
[संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] देखिए हमारा जैसा जन्म ही होता है हम बचपन से ही जैसे होते हैं जैसा हमारा शरीर है उसकी निर्मित थी इसकी संरचना हम भीतर से एक अपूर्णता एक तरह की बेचैनी है खालीपन लेकर के ही पैदा होते हैं और वह दुख देता है चुभता है यह इंसान की बात तो इंसान उसको किसी तरीके से भरना चाहता है भीतर के खालीपन को हिंसा की शुरू करने के लिए अभी आज की चर्चा को जो मैं परिभाषा दे सकता हूं वह यह है की भीतर की बेचैनी का इलाज करने की कोशिश करना बिना उसे बेचैनी को समझे यही इंसान मैं भीतर से एक खलबली सी अनुभव करता राहत हूं ठीक है अच्छा नहीं ग रहा है उसका मुझे कुछ तो करना पड़ेगा ना शरीर में तकलीफ हो तो इंसान कुछ तो उसका उपचार करना चाहता है उसका नकली इलाज बिना बीमारी को समझे इलाज करने की कोशिश हिंसा क्योंकि देखिए क्या है 2 मिनट और लेकर बोलना हूं उसे पर भीतर जो कुछ भी है वह बेचैन करता है दुख देता है हर इंसान अनुभव करता है की जिंदगी में कुछ कमी है कोई आपको नहीं मिलेगा जो रहेगा की सब बढ़िया चल रहा है कोई नहीं रहेगा की आगे कुछ नहीं चाहिए सबको अभी आगे चाहिए सब की इच्छाएं तमन्नाएं हैं आगे के लिए और कहां जाकर के इच्छा पुरी करेगा इंसान उसको ही सामने दुनिया ही दिखाई देती है उसको लगता है यही है सब कुछ इसी में जाकर के किसी तरीके से अपनी अतिरिक्त है उसको ठीक कर लो तो जो भी कुछ उसको नजर में आता है जी भी चीज पर अपने हाथ रख सकता है उसका फिर वह शोषण करता है यही हिंसा है अपनी बेचैनी को नहीं समझना इसीलिए वह यह नहीं समझना की क्या करके वह चैन तक शांति तक पहुंच सकता है फिर उसको बाहर जो कुछ भी दिखाई देता है रुपया पैसा जीव जंतु स्त्री पुरुष वह हर चीज पर चढ़ बैठना चाहता है और किसी भी तरीके से उसका इस्तेमाल करके अपने खालीपन को भरना चाहता है तो इसलिए हमें हर तरीके की हिंसा दुनिया में दिखाई देती है जिन पर हिंसा की जा रही है वह स्वयं भी हिंसक है बस बात संयुक्त की है बात इसकी है आपस में वह भिड़े हुए हैं एक जीत जाता है हर जाता है जो हर गया है जिसका शोषण हो रहा है उसका बस चले तो वह भी शोषण कर ही डालें तो ऐसा नहीं है की जो शोषण है मंत्र रूप से शोषण होने एक्सप्लोइटर होने या एक्सप्लोइटेड होने से नहीं है हिंसा का संबंध अनिवार्य रूप से आंतरिक आज्ञा से है जो खुद को नहीं जानता जो अपने मां को नहीं समझना दुनिया में वह है क्या और यह दुनिया क्या चीज है इसको नहीं समझना वो हिंसक ही होगा उसे हिंसा की अभिव्यक्ति भले ही 10-20 सो 50 अलग-अलग रूपन में होती रहे वो सब जो रूप है आपने कहा उसकी चर्चा होगी अभी शुरुआत में सभी की हो गई या जो समझना की फिर कोशिश करता है अंदर वह बादल ही तो है लगातार के लिए खुश हो जाता है मां बहस जाता है उसमें ब्रह्म भी है ज्ञान भी है स्वार्थ भी है उसमें ईर्ष्या भी है उसमें यह सब छोटे बच्चों में होती है ना चीज कुछ ऐसा नहीं की कोई उन्हें शिखा देगा तो ये साबुन में आएगा और यह सब चीज पशुओं में भी पी जाति हैं तो जो बच्चा पैदा होता है हम जैसे जन्म लेते हैं हम पशुओं जैसे ही तो होते हैं बस इतना है की पशुओं में कोई बेचैनी नहीं होती जिसका उन्हें इलाज करना पशु पूरे तरीके से प्राकृतिक होते हैं वह अपनी शारीरिक संरचना से बंदे हुए हैं और उससे कोई तकलीफ नहीं है और अगर उससे आगे नहीं जाते तो वह घबरा नहीं जाते हैं उनको तनाव मनोरमा डिप्रेशन नहीं हो जाता है शेर जंगल में घूम रहा है जिंदगी में ऐसा थोड़ी होता है की गरीब पैदा हुआ था और कोशिश करके अमीर हो गया समझना पड़ेगा की इंसान है क्या और वस्तावो से कौन सा मुकाम चाहिए नहीं तो वो अंधे त्रिकोण से अपनी कामनाओं को पुरी करने के लिए कुछ भी करता है यही हिंसा है हिंसा का संबंध दूसरे को दुख देने से भी नहीं है जो हम कहते हैं ना गीत अगर आपने दूसरे का दिल तोड़ दिया दूसरे को तकलीफ दे दी तो वो हिंसा है वो भी आवश्यक नहीं है आप हो सकता है अपनी और से दूसरे को सुख दे रहे हो वो भी बहुत बड़ी हिंसा हो शक्ति है क्योंकि हिंसा का संबंध दुख सुख से नहीं है हिंसा का संबंध आपके आज्ञा से है भीतरी तोर पर नासमझ रहते हुए आप दूसरे की भलाई करना चाहे वह भी हिंसा है दुनिया के सब मां-बाप ऊपरी तोर पर तो यही कहेंगे ना की बच्चों की भलाई करना चाहते हैं ना जीवन का कुछ पता है तो भले ही उनका कहना यह राहत है की बच्चे का मैं भला करना चाहता हूं पर देखिए बच्चों क्या हालात कर देते हैं मां-बाप के ही पालनपुर पोषण संरक्षण से निकाल कर के आई है ना आज आप दुनिया के जितने भी लोग देख रहे हैं उसमें से कुछ विचारों को छोड़ दीजिए अनाथ हो गई यकीन होगा या कोई और उनकी वजह थी मां आप के साथ नहीं रहे पर 100 में से 99 लोग तो मां-बाप के द्वारा ही पहले पहुंचे गए हैं बड़े किया गए हैं और बड़े होकर के देखिए कैसे निकाल आते हैं अगर सब मां-बाप बच्चों का भलाई करना चाहते हैं तो दुनिया की आबादी इतनी बुरी क्यों है इन्हें बड़ा किसने बना दिया इसका मतलब भलाई की नित मंत्र से भलाई नहीं हो जाति भलाई की नित रहते हुए भी घर हिंसा हो शक्ति है अगर आप समझ नहीं रहे मुझे समझ की कमी है दिशा की कमी है वही आध्यात्मिक ज्ञान है उसके बिना हिंसा होगी ही होगी जिससे फिर वह बच्चा जैसे बड़ा होता जाता है प्रश्न पूछने की या सोने की जो बुलेट है वो नहीं करता है या 22 साल की थी तब पता चला तब तक मेरे मां में यह प्रश्न भी नहीं आया की यह दूध कहां से ए रहा है मतलब कैसे ए रहा है किसके लिए ए रहा है की यह जो प्रश्न आया की दूध कहां से ए रहा है यह भी एक तरह की कंडीशनिंग हो मूल प्रश्न यह नहीं है दूध कहां से ए रहा है मूल प्रश्न यह मैं कहां से ए रहा हूं भाई ऐसा थोड़ी है की बच्चे सवाल नहीं पूछते हैं बच्चे बहुत तरह के सवाल पूछते हैं पर उन सवालों से कोई बहुत लाभ होना नहीं है मैं यह नहीं का रहा हूं उन सवालों का उत्तर नहीं दिया जाना चाहिए या उन सवालों को ढाबा दिया जाना चाहिए पर बच्चा जो प्राकृतिक रूप से प्रश्न पूछ रहा है वो ठीक है उसकी जिज्ञासुहल है कुछ उसका दे दीजिए उत्तर से मुझे लेकिन उनसे लाभ होने वाला नहीं है जो मूल प्रश्न है वो ये है की यह मां क्या चीज है इसमें क्या चल रहा है इसको चाहिए क्या अगर वह यह प्रश्न नहीं पूछ रहा है तो बहुत सारे प्रश्न पूछेगा क्रिकेट मैच चल रहा होता है लोग बार-बार पूछते हैं स्कोर क्या हो गया स्कोर क्या हो गया अब इन प्रश्नों से क्या लाभ है तो हम बहुत ज्यादा पूछो लेकिन सिर्फ सवाल पूछने से क्या होगा व्यर्थ के सवाल पूछते रहिए जीवन भर उससे कुछ मिलन नहीं है देखिए हम जैसा आपने अभी प्रश्न करना है उसमें थोड़ा सा यह भाव निहित है की बच्चा ठीक-ठाक पैदा हुआ था कंडीशनिंग में उसको खराब कर दिया नहीं वो बात नहीं है हम पैदा ही गड़बड़ होते हैं ऐसा नहीं है की हम ठीक पैदा हुए थे और कंडीशनिंग ने सामाजिक व्यवस्था ठीक नहीं थी और शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं थी और तारे जमीन पर हो गया तो उसे करण हम खराब हो गए वो सब नहीं है बात वह सब वह सब अपने आप को बताते हैं बच्चे की मासूमियत का जो सिद्धांत है जो बच्चे की मासूमियत का हमने एक सपना बना रखा है उसको बरकरार रखना के लिए बच्चा नहीं मासूम पैदा होता है बच्चा जानवर पैदा होता है जिसको आप कहते हैं थोड़ा सा मुझमें पर बात करेंगे है क्या कंडीशनिंग एक बच्चा है आप उसको कुछ बोल रहे हो कुछ आपने उसको बता दिया यही कंडीशनिंग है ना तो कंडीशनिंग भी एक प्रकार का ज्ञान है ऐसा नहीं है की बच्चे कुछ बताना गलत है सही ज्ञान बच्चे की पुरानी कंडीशनिंग को साफ करता है कंडीशन तो हम पैदा होते ही है ना कौन सी कंडीशनिंग लेकर के संस्कृत हम पैदा हुए हैं वह कौन सी कंडीशन है जो हम लेकर पैदा हुए हैं बायोलॉजिकल जैविक कंडीशन ठीक है छोटा सा बच्चा भी होता है उसे गुस्सा ए जाता है यह हटाने के लिए भी ज्ञान जरूरी है तो ऐसा नहीं है की बच्चे को अगर आप कुछ चीज बता रहे हो शिखा रहे हो तो यह अपने आप में कोई गुना हो गया नहीं यह आवश्यक है की बच्चे को वही बातें बताई जाए जिनका सवाल उसने कर है क्योंकि अगर आप उसको वहीं से बताएंगे जिसके बाबा तो सवाल कर रहा है तो उसके सवाल तो बहुत सीमित होते हैं और उसके सवाल भी कहां से उठ रहे हैं वो भी उसकी अपनी फिजिकल कंडीशनिंग से उठ रहे हैं तो उन सवालों का ही उत्तर दिया गया यदि मंत्र तो बच्चों कोई बहुत लाभ नहीं होना है तो एक बात तो यह की बच्चे को बताना सीखना पटना उससे बातें करना बहुत आवश्यक है जो बातें उससे की जा रही है जो शब्द उसके कान में पढ़ रहे हैं जो प्रभाव उसके मां पर पढ़ रहे हैं अगर वह उसकी फिजिकल कंडीशन इन को उसकी जो प्राकृतिक पेसिफिक रिक्तियां हैं उनको हटा का रहे हैं तो हम उसको फिर का देंगे की उसको ज्ञान मिल रहा है 2 साल का हो गया 3 साल का हो गया उसको कोई छोटा बच्चा मिल गया और 6 महीने का और इनमें भी आपस में बड़ी ईर्ष्या वाली हो जाति है की सब उसको देख रहे हैं हमें नहीं देख रहे तो अब उसको आपने कुछ बातें बताई उसको बैठकर के उसके तरीके से जैसे वो समझ सके आपने उसको कुछ समझाया यह बताना अगर उसको बेहतर बना देता है तो इसको हम का देंगे ज्ञान मिला उसको अब उसके जो पाषाविक बैंड थे जो उसके एनिमल इंस्टिंक्ट थी उससे उसको थोड़े मुक्ति मिली लेकिन मां आप जो बता रहे हैं या टीवी से उसे पर जो प्रभाव पद रहा है अगर उससे उसकी फिजिकल कंडीशनिंग के ऊपर सोशल कंडीशनिंग की एकता और पद रही है धूल के ऊपर धूल की एकता और पढ़ रही है तो आप कहिए की वो बच्चा कंडीशन किया जा रहा है अल में शिक्षा का उद्देश्य क्या है शिक्षा का उद्देश्य है की हम जिन संस्कारों और बंदों के साथ पैदा ही हुए हैं शिक्षा उनका समाधान करें इसी तरीके से बच्चे को संस्कार दिए जाते हैं वह संस्कार ऐसा नहीं है की सभ्यर्थी हैं बच्चे को संस्कार तो देने पढ़ेंगे और वह संस्कार ऐसे होने चाहिए जो पुराने संस्कारों को कटे लेकिन हम गड़बड़ क्या कर देते हैं की क्योंकि हम खुद ठीक से संस्कृत नहीं है हमारे अपने ही पुराने बंधन नहीं कटे हैं तो बच्चे को जब संस्कार देते हैं वह उसके पुराने संस्कारों को तो नहीं ही काटते हैं वह स्वयं नए बंधन बन जाते हैं तो ऐसी बात है की बच्चा बीमा पैदा हुआ और क्या बीमारी है उसकी उसकी डे ही उसकी बीमारी है उसके बायोलॉजी उसकी बर्थ ही उसकी बीमारी है एक बीमारी और लेकर पैदा हुआ और फिर जहां पैदा हुए वहां से बड़े शिक्षक और मां-बाप और सब जिम्मेदार किम के लोग हैं वह का रहे भाई हमारे पास दवाइयां हैं हम तुम्हारी बीमारी को दूर करेंगे सामाजिक संस्कार और शिक्षा बीमारी पैदा कर दी वो एक बंधन लेकर पैदा हुआ था बहुत बढ़िया है तो कंडीशनिंग वाली जो बात है वह थोड़ी सी सूक्ष्म है हमें उसको सीखना तो पड़ेगा ही बच्चे को हम यदि यह सोचें की वो मासूम पैदा होता है और समाज ने उसको बिगाड़ दिया तो ये बात बिल्कुल ठीक नहीं है समाज का बच्चे के प्रति दायित्व है और समाज यदि बच्चे को सिखाएगा नहीं समझाएगा नहीं तो बच्चा वैसा ही रहेगा जैसे जंगल में कोई जानवर पैदा होता है एक बच्चा पैदा हो और वो जन्म से ही जंगल में रहा है जंगल में ही प्ले बढ़ तो आपको क्या लगता है की वह विद्वान बन जाएगा 20 की उम्र आते-आते वो कैसा हो जाएगा वो जैसे ही जंगल का एक बार बार पशु है वैसे ही रहेगा इंसान जंगल में ही तो था तो क्या कर करता था तब वो बाकी सब जानवर से वैसी इंसान था लेकिन इंसान में एक शारीरिक फर्क है बाकी जानवरों से वह यह है की हमारा मस्तिष्क हमारा पूरा जो डीएनए है वो इस किम का है की हम बेचैनी अनुभव करते हैं तो आप बच्चे को छोड़ दीजिए वो भी वही कहानी दोहराएगा जो हमने दोहरे थी आज से 1 लाख साल पहले जंगल में हमने क्या कर था हमने बात हमने बाकी जानवरों जैसा जीवन बिताते बिताते आज पैदा कारी फिर हमने पत्थर के हथियार बनाए और फिर हमने यह कर फिर वो कर और फिर एक दिन हम जंगल से बाहर आकर के खेती करने ग गए बच्चा भी वही करेगा जो हमने दो रही थी लाख साल पहले सृष्टि नष्ट हो जाए ग्यास नहीं जिज्ञासा नहीं बेचैनी आप मां लीजिए आज एक अद्विक युद्ध हो जाता है ठीक है सब कुछ नष्ट हो जाता है जंगल भर बचते हैं कुछ और कुछ इंसानों जंगलों में और उन इंसानों के पास ज्यादा कुछ बच्चा नहीं है ना स्कूल है ना कॉलेज है थोड़ा बहुत ज्ञान है वो ज्ञान भी किसी तरह समय के साथ नष्ट हो जाता है तो हम फिर से वही लाखों साल वाली पुरानी स्थिति पर पहुंच जाते हैं क्या होगा कालचक्र स्वयं को पुनः दोहराएगा जैसा-जैसा हमने लाख दो लाख या 10 लाख साल पहले कर था वही हम पूरा करेंगे तो फिर मेरा एक सवाल है की जितना हम ये पुरी दुनिया आधुनिकता के अविष्कार कर रहे हैं इस जारी लोगों ने अविष्कारों के नाम पे न्यूक्लियर बॉन्ब और क्या-क्या नहीं बना लिया रिस्पेक्ट लव बट इस खालीपन कोई भरने उसको का रहे हैं साइंस इस सो माइट ऑफ कैसे आईटी इसे बट उसके जारी हम ऐसे अविष्कार कर रहे हैं हर जगह चिंपांजी हैं हम वनमानुष वनमानुष है हम आप उसके हाथ में स्टैंड दे देंगे यह न्यूक्लियर वेपन का बटन दे देंगे तो क्या करेगा भीतर से तो हम वही है ना जो हम हुआ करते थे लाखों साल पहले हम जानवर ही तो है जानवर जिसने कपड़े पहन लिए हैं जानवर जिसने भाषा सिख ली है जानवर जिसके पास अब कई तरह की तकनीके ए गई हैं ताकत ए गई है लेकिन अपने अंतिम भीतरी केंद्र पर तो उसकी वृत्तियां सब पाषाविक है हम कुछ भी ऐसा करते हैं क्या जो जंगल के जानवर नहीं करते मूल रूप से हमें क्या चाहिए हमें ताकत चाहिए जंगल के जानवर को भी वही व्यक्ति रहती है हमें अपने अपने काबिले पर राज करना है हम अपने क्षेत्र में किसी और घुसने नहीं देना चाहते हम अपना ही वंश चलाना चाहते हैं वह जंगल में भी होता है वह शहर में भी होता है तो बहुत अंतर थोड़ी ए गया अंतर बस यह है की जो छटपटाहट हम में है वह जंगल के जानवर में नहीं है है तो हमारी जो मूल कामना की है वह छटपटाहट से मुक्ति की और हमारी छटपटाहट इतनी गहरी है की वह हमसे एन जान कितने आकृति कर लेती है वही हिंसा है हमारी जो भीतरी तड़प है वही बाहर हिंसा बनकर अभिव्यक्त होती है जो इंसान खुद दुखी है दूसरों को दुखी करेगा ना बस यही हो रहा है हमने यह सब बना लिया है हम कपड़े कपड़े पहन रहे हैं हम सड़कों पर चलते हैं तो हमारे लिए मानना और और मुश्किल होता जा रहा है की हम जानवर है और जब तक हम यह मानेंगे नहीं की हम जानवर हैं तब तक हम उसे जानवर का कोई इलाज भी नहीं कर पाएंगे किसी बीमारी का इलाज हो सकता है अगर आप उसका डायग्नोसिस निदान क्या जल्दी पहुंच गए उसे पर जल्दी से उत्तर भी दे दिया मुझे जानवर है भीतर हम उसको रोज रोज ताकत देते हैं अपने केमोन से तो जानवर से मुक्ति अपने के लिए कोई नया बड़ा कम नहीं करना होगा आपने खाना की बहुत बड़ा कम है उससे तो डील करना नहीं ऐसा नहीं है उससे मुक्ति अपने के लिए सबसे पहले कुछ कम रोकने होंगे नए कम शुरू करने जरूरी नहीं है जो कम हम करें ही जा रहे हैं वह सारे कम कौन कर रहा है हमारे भेज में जानवर कर रहा है उन केमोन को रोकना होगा और वह बहुत मेहनत से करते हैं तब वह कम सरकार होते हैं तब भी हो नहीं पाते हैं कामनाएं पुरी कहां होती है हमारी और साड़ी कामनाएं हमारी पछता की कामना है जो अभी समझ जाएंगे की आप जिसको कहते हो अपनी कामना अपनी हसरत अपना उद्देश्य अपना लक्ष्य मैं यह हूं मुझे यहां जाना ये करना है वो सब कुछ नहीं है वो भीतर का जानवर है जो यह सब करवा रहा है तो फिर आप उन सब चीजों में बहुत जोर नहीं लगाओगे ना उन चीजों में जोर लगाना ही हिंसा है और उन केमोन से हाथ वापस खींच लेना ही अहिंसा है उदाहरण के लिए जंगल का जानवर जान लगा देता है की कबरे पर राज करूंगा ठीक है भेड़ियों के एक ही दाल के दो भेड़ी आपस में लाड मरते हैं क्यों क्योंकि सरदार दोनों को बन्ना है सरदार हमें ही बन्ना होता और उसके लिए हम जिंदगी में कितनी मेहनत करते हैं एक बार आप समझ जैन की भीतर का भेड़िया है जो ये सब कुछ कर रहा है आप अपनी मेहनत रॉक देंगे ना जीवन में थोड़ी शांति आएगी क्योंकि अगर आप भेड़ियों के सरदार बन भी गए तो रहे तो भेड़िए क्या मिल जाना है उससे यही सब कम इन पे लागू होते हैं की भाई मुझे और पैसा कामना है मुझे इतना बड़ा घर बनाना है मुझे अपना नाम बरकरार रखना है यह सारे कम हमसे हमारा जानवर कर रहा है और ये कम करने के लिए बहुत खतरा हैं हमारी खून पसीना एक हो गया है भीतर के जानवर को समर्थन देते देते पर इसका परिणाम भी तो बहुत अच्छा भी है इंसान जंगल से आके कितनी प्रगति की है हमने क्या किया यह इन्होंने न्यूक्लियर का न्यूक्लियर के अपने फायदे भी होते हो सूरज की जो अंदर की ताकत है वो हमने समझा अंडरस्टैंडिंग फ्यूजन और इस्तेमाल ही थी तो हमने जो भी कुछ कर है ये सार्थक भी एक ही शर्ट में माना जाता है की बेचैनी कुछ कम होती लेकिन बेचैनी से अच्छे कम भी हो सकते हैं कोई कम आप इसलिए कर रहे हो क्योंकि बेचैनी है तो उसे कम को सफल सिर्फ एक शर्ट पर माना जा सकता है की बेचैनी है गई है गई आपने इतनी शताब्दियों तक शर्म कर है और जी बेचैनी करण शर्म कर है वह बेचैनी यथावत है बल्कि और बाढ़ गई है आदमी आज मानसिक रूप से जितना बीमा है उतना तो कभी नहीं था तो बेचैनी से आपने बहुत मेहनत कारी और वो मेहनत करके बेचैनी और बड़ा ली यह आपकी सफलता में जा रहा है बेचैनी तो बाढ़ ही रही है ना एक प्रतिशत भी कम हुई है क्या फिलहाल कैसे जी रहा है पहले यह तो देख ले अभी और ए गया आते हैं आपने जो बातें कारी थी वह भौतिक स्थल की थी मटेरियल टाकी थी की न्यूक्लियर एनर्जी मिल गई है यह हो गया मटेरियल सब है आप जब मटेरियल प्रोग्रेस देखते हो तो आप अकाउंटिंग ठीक से नहीं कर रहे साड़ी जो हां समस्या है ना वो अकाउंटिंग की है आप अपनी कंपनी का है अपनी संस्था का नल बनाते होंगे प्रॉफिट और लॉस अब बैलेंस सीट बनाते होंगे प्रॉफिट और लॉस में आप सिर्फ रेवेन्यू लिखने हैं खर्च भी लिखने हैं उसको आप क्या कहेंगे इसी तरीके से आप कंपनी और जरा अपना पीएनआर बैलेंस सीट बना लीजिए और बताइए की असेट्स आपने बधाई हैं लायबिलिटी खड़ी कारी है ज्यादा आपका रिवेन्यू ज्यादा है आपकी कॉस्ट से ज्यादा है बस यह है की आपको कॉस्ट अकाउंटिंग करनी आई नहीं है तो आपको ग रहा है की साहब हमने तो पिछले 10000 साल में जो कम कर है ये जो ह्यूमन कंपनी ने जो कम कर है जिसका मैं हिस्सा हूं एक स्टिक होल्डर हूं मैं उसमें वर्कर भी उसे स्टे होल्डर भी हूं हमने जो कम कर है वो बहुत मुनाफे का कम रहा है सिर्फ इसलिए ग रहा है मुनाफे का क्योंकि अकाउंटिंग नहीं कर रहे हैं ठीक से हम मैं बात कर रहा था की यह जी होटल में हूं ठीक उसके सामने वहां पर समुद्र है तो यह होटल भी नहीं बचेगा ऊपर है और उसके सामने सड़क है वह सड़क लगभग समुद्र ताल पर है जैसे पानी बढ़ेगा वो होटल भी जाएगा वो सड़क भी जाएगी ठीक है वहां पर आपको बनाना पड़ेगा बहुत ऊंचा और मजबूत बैंक क्या आपने अपनी अकाउंटिंग में इस कॉस्ट को शामिल कर है आप रिवेन्यू शामिल कर रहे हो कॉस्ट तो शामिल ही नहीं कर रहे अब मटेरियल कॉस्ट की बात कर रहा हूं अभी जो उसकी इनटेंजिबल कॉस्ट है जो आंतरिक कॉस्ट है उसे पर बाद में आएंगे पहले जो उसकी मटेरियल कॉस्ट है क्या हम उसको भी शामिल कर रहे हैं क्या हमें पता भी है की हमने कितना पाया है कितना खोया है परली मटेरियल टर्म्स में हमें वो भी नहीं पता है उदाहरण के लिए 280 पम से बढ़कर कार्बन डाइऑक्साइड ₹450 पम हो गई है ये मटेरियल बात है ना बिल्कुल इसकी कोई अकाउंटिंग होती है किसी कंपनी की बैलेंस सीट में या किसी नेशन के जीडीपी में आपने जो तरक्की कारी उसे तरक्की में आपने इतना कार्बन वातावरण में उत्सर्जित कर दिया पर आप जब अपना जीडीपी बताते हो की मेरा जीडीपी इतना हो गया है और इतने प्रतिशत की उसमें बढ़ोतरी है उसमें कहानी बताते हो की उसकी एनवायरनमेंट कॉस्ट क्या है बाजार में इतनी साड़ी चीज ए गई है आप जब इसकी कीमत देते हो बाजार में उसमें कहानी आपसे पूछा जाता है की इसको बनाने में जितना आपने दुनिया को बर्बाद कर है उसका भी तो टैक्स दे दो जबकि इसकी कीमत में दुनिया की बर्बादी शामिल है या नहीं शामिल है और मैं दुनिया की इंटेंसिबल बर्बादी की आंतरिक बर्बादी की बात नहीं कर रहा मैं मटेरियल डिप्लीशन की बात कर रहा हूं हम क्या उन मटेरियल कॉस्ट की भी अकाउंटिंग कर रहे हैं तो एक तो ये बात हुई की आप जो ये पुरी व्यवस्था चला रहे हो वो नीचे से क्या लेती है रा मटेरियल रा मटेरियल की आपको अकाउंटिंग कारी नहीं रहे पृथ्वी को आपने पूरा खत्म कर दिया आम आदमी की कामनाओं को पूरा करने के लिए क्या पृथ्वी के पास संसाधन है नहीं है तो पृथ्वी दास पृथ्वियां चाहिए होगी हमारा एक स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग है स्टैंडर्ड ऑफ कंजप्शन है जो की औसत से बहुत ऊपर का है भारत में ही हम औसत से बहुत ऊपर का उपयोग कंजप्शन करते हैं भारत की पुरी आबादी सिर्फ उतना ही शुरू कर दे जितना की हम लोग करते हैं तो क्या पृथ्वी पर अपने संसाधन है और भारत की आबादी प्रति व्यक्ति पर कैपिटा उतना के अंदर से शुरू कर दे जितना औसत एक अमेरिका का व्यक्ति करता है तो 17 पृथ्वियां चाहिए होगी तो आप जो अपनी कंपनी चला रहे हो तो ह्यूमन कंपनी उसको तो रा मटेरियल की सप्लाई ही नहीं हो शक्ति क्योंकि एक के बाद दूसरी पृथ्वी तो है नहीं कोई आपके पास आप रा मटेरियल कहां से लगे अपनी कंपनी चलने के लिए तो पहले बात तो रा मटेरियल नहीं है दूसरी बात जो आउटपुट निकाल रहा है उसमें आपका जो डिसाइड गोल था वह था बेचैनी से मुक्ति वो तो मिली नहीं इनपुट के तोर पर आप सब का गए सब नष्ट कर दिया जंगल मशीन आउटपुट क्या दिया है और ज्यादा बेचैनी हम कितने स्मार्ट लोग हैं हम कितने स्मार्ट लोग हैं इनपुट में क्या कर पुरी पृथ्वी को का लिया यही कराया ना हमारी ह्यूमन मशीन ने पिछले 10000 साल में सर रा मटेरियल का लिया और बर्बाद कर दिया सब कुछ नहीं छोड़ रे तक ए गई नदी किनारे की रेट तक हमने का ली ठीक कुछ नहीं छोड़ और आउटपुट में हमें चाहिए क्या था की यार थोड़ा चैन मिल जाए वह भी नहीं मिला जबरदस्त लोग हैं की नहीं और हमारी एंबीशन को पूरा करने के लिए पृथ्वी के पास संसाधन ही नहीं है एंबीशन होगी कहां से पुरी और वह सारे संसाधन आप का भी ले मां लीजिए कर लीजिए किसी को महशर नहीं होता हम शायरी नहीं कर रहे हैं चैन मिल सकता है बस वैसे नहीं मिल सकता जैसे हमने सोचा है की मिलेगा इस से सबसे ज्यादा डरते हो जो चीज आपको शांत करती है वही चीज आपको लगता है की आपको खत्म करती है तो शांति मिलती है खाट में के साथ डरते हैं तो इसीलिए शांति भी हमें नहीं मिलती से आप कहते हो की मैं नहीं करूं खत्म कर दो फिर क्या करूं फिर मेरी पहचान क्या है आज तक आप खाओगे खत्म कर दो खत्म करके फिर क्या करूं सामने कुछ रखा हुआ है उनमें भारी मिर्च डाली हुई है जहर जैसी भारी अब मुंह में ले ली है कोई आकर का रहा है उसको थूकों और पानी पियो तो क्या पूछेंगे की यदि इसको थूक दिया तो खाऊंगा क्या करना है और इसको अगर मुंह में रखा है तो मुंह ही नहीं दिमाग भी चल रहा है और जलते दिमाग के साथ तो मैं बिल्कुल नहीं जान पाऊंगा की कहां और कुछ मिल सकता है खाने के लिए और क्या मिल सकता है खाने के लिए वह जन के लिए भी पहले इसे थूकना पड़ेगा इसको ठोकूंगा तो दिमाग थोड़ा शांत होगा तो मैं जानता हूं की कहां क्या मिल रहा है प्रसाद पानी में बैठा हुआ हूं मैं जानू राखी को प्रदर्शित करती है जीवन क्या जिंदगी का एक का का खींचते लोगों के सामने कहानी किरदार टीवी सिनेमा यह आपका कम है अब आप ऐसी भी चीज लोगों को दिखा सकते हो जिससे उनको तत्काल एक मनोरंजन मिलता है और ठीक है वह अपना थोड़ी डर के लिए उनको लगता है की कुछ मिला सकते हो जो थोड़ा स्थाई तो रखना है जिसमें शाश्वत्ता है जो उनके सचमुच कम आएगा और बोलिए नहीं की आदमी हर आदमी छह कुछ ऐसा ही रहा है जो सचमुच उसके कम आए तो मैं तो यह पूछ रहा हूं की व्यापारिक तोर पर भी अगर आप यह भी देखें की आपकी फिल्म या आपका टीवी सीरियल कितना मुनाफा कमेगा व्यापारिक तोर पर भी सबसे अच्छा कम क्या है सबसे अच्छा पैसा क्या हुआ आपकी भी गहन प्यास शांति की मुक्ति की दिशा की है और जो चीज आपको जितनी शिद्दत से चाहिए होती है आप उसके पीछे उतना भगोड़े ना उसकी मांग उतनी ज्यादा करोगे ना अगर मैं उसे मांग को पूरा कर पाऊं व्यापार के तोर पर भी तो वह व्यापार अच्छा चलेगा की नहीं चलेगा तो यह थोड़ी बात है की आप जो कम कर रही है उसको बैंड करना है बस उसे कम को सही करना है की आपके कम में तो अपार संभावना है की जिंदगी का जो जो असली खाकर खींच दिया जाए हकीकत बिल्कुल बयान कर दी जाए लेकिन चीज दोनों हो शक्ति हैं रजत पाताल पर आप उनको सच्चाई भी बता सकते हैं और सच्चाई से उनको बहुत दूर खाबो की दुनिया में भी ले जा सकते हैं दुर्भाग्य यही है की 99% जो प्रोडक्शन होता है इसीलिए होता है की आपको आपकी जिंदगी के तथ्यों से और दूर किसी हां किसी रूमानी फंतासी की दुनिया में ले जय जाए जहां पर आप थोड़ी डर के लिए ऐसे हो जाएंगे वहां क्या बढ़िया बड़ी कथा चल रही है देख लो मस्त हो जो वापस ए जो का पी के उससे क्या मिलन है थोड़ी डर के लिए हो रहा है निर्माता को भी हो रहा है निर्देशक को भी हो रहा है बस हमें नल बनाना नहीं आता तो समझ में नहीं आता की घाट हुआ है हमारी वही हालात है की एक कंपनी है जिसको ग रहा है एक बैंक है जिसको पीएनआर बनाना नहीं आता ठीक है वह इसीलिए नहीं पता क्योंकि मैं मिर्च भारी हुई है सब पता चल जाएगा थूक देंगे फिर कुछ अच्छा हो जाएगा वो सबको नहीं आता है अभी आप मुझे कोई अपशब्द बोल देंगे नहीं ऐसा नहीं ऐसा नहीं आप मुझे अभी कोई अपशब्द बोल दे तुरंत यहां चोट लगती है नहीं लगती है लगती है आप किसी के घर जैन वो आपके लिए खड़ा ना हो आपको पानी ना पूछे तुरंत चोट लगती है नहीं लगती है तो ऐसा थोड़ी है की मुंह में मिर्ची आएगी तभी चोट लगेगी जो इंटेंसिबल चीज होती हैं वह भी हमें चोट तो बराबर की देती है तत्काल देती है वो बात नहीं है [संगीत] जैसे जैसे बबल बंता है ना पहले अर्थव्यवस्था में कैसे बना था 2008 का याद करिए जो इकोनामिक कैटास्ट्रॉफी हुई थी पुरी क्या थी यही तो थी की आप जिन चीजों को अपना ऐसेट जिन रहे थे वह आपके ऐसेट थे ही नहीं वो फिक्टिशस थे लायबिलिटी आपकी खड़ी हुई थी उनकी और आप ठीक से देख नहीं रहे थे अपने आप को आप धोखा दिए हुए थे की साहब मेरा बैंक तो बहुत मुनाफे में चल रहा है और एक दिन आकर के सच्चाई आपको झटका देती है और आपको पता चला है आपने इतने सालों तक सिर्फ और सिर्फ नुकसान कमाया है तो वहां तो चलिए बस की बात थी कुछ बैंक दिवाली हो गए बैक गए यहां तो पुरी पृथ्वी दिवाली है और यहां सबको यही ग रहा है की हम बहुत होशियार लोग हैं और मुनाफे का कम कर रहे हैं हर आदमी घाटे का कम कर रहा है [संगीत]
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