जिनके सामने झुकते रहते हो, वो इस लायक हैं आचार्य प्रशांत, उद्धरण (2022)
[संगीत] किसी को कुछ स्मरण भी है गीता का कोई सम्मान है गीता नहीं हो पाएगा क्योंकि वहां वह क्या बोलते हैं [संगीत] कुछ अपना नहीं है तुम किस मुंह में फैंस हुए हो जो तुम भविष्य को लेकर क्या बना करके बैठे हुए हो ठीक अभी जो सही कर्म है [संगीत] जिन लोगों को खुश रखना में अपनी जिंदगी खराब की है आपके जिनके डर के सई में जिंदगी बीता रहे हो बुखार क्या लेंगे आपका पूछिएगा अपने आप से या जिनको पैसा वगैरा दिखा करके बहुत प्रभावित इंप्रेस करते हो वह तुमसे प्रभावित हो भी गए तो तुम्हें मिल्क ए जाएगा मिलता है कुछ या जिनका पैसा रुतबा देख करके आप प्रभावित हो जाते हो उनसे प्रभावित होकर आपको क्या मिल जाता है यह सब किसी कम का है क्या बस छाया राहत है लेकिन मां पर अध्यात्म सर्वप्रथम एक विद्रोह होता है अतीत के और आंतरिक धरों के विरुद्ध जो अतीत में चला आया नहीं चलेगा और जो भीतर भीतर लगातार चला राहत नहीं चलेगा लेना एक एन देना दो दुनिया सर पे चढ़ी आई है तुम हो कौन यही सवाल होना चाहिए हो कौन क्यों सुन तुम्हारी सुनेंगे ऐसा नहीं की हमारे पास कम नहीं होंगे हमारे पास कान उनके लिए होंगे जिनके पास प्रेम है तुम्हारे पास प्रेम है तो मेरे पास कम है और अगर तुम्हारे पास प्रेम है तो फिर मेरे पास जुबान भी है बात भी उन्हें से करूंगा जवाब भी उन्हें को दूंगा जिनके पास प्रेम है उनकी जो प्रेम करते हैं बोलेंगे अभी बस उन्हें से जो प्रेम करते हैं जो यूं ही चले आए हैं लेना एक एन देना दो घूस चले ए रहे हो कोई डर दिखा रहा है कोई दोस्त बता रहा है कोई पैसा चमक रहा है जो भी लेकर आए हो अपने घर रखो हमसे तुम्हारा ताल्लुक क्या आज तक तुम कोई कुछ नहीं मिला हमें क्या मिल जाएगा हेल्दी कंटेंप्ट दुनिया के प्रति एक स्वस्थ अवमानना का भाव रखिए जो कोई आक्रामक हो रहा जिसके इरादे आपको अपनी उम्मीद के अनुसार चलाना उसको बस यही सवाल तू है कौन हुआ ए रही है और बड़ा मल्टीनेशनल का ऑफिस है उसके आप रिसेप्शन पर बैठे हैं और बड़ा इंपोजिंग होता है वह आपके ऊपर एकदम चड्ढा आता है बहुत पैसा लगाकर और रिसेप्शन बनाया जाता है ताकि आप जल्दी से प्रभावित हो जैन सुरेंद्र कर दें जल्दी से जैसे ही देखिए ये रिसेप्शनिस्ट हिसाब से बनाया गया है वहां पर ऐसे बैठिए हम उल्टा करते हैं बदतमीज से बदतमीज आदमी भी जब किसी बड़ी कंपनी के रिसेप्शन पर बैठा होता है किसी फाइव स्टार होटल में जाता है तो वहां वह बहुत तमीजेदार और आदाब वाला हो जाता है कल मिलकर पालतू हो जाता है जर्मन शेफर्ड फाइव स्टार में पहुंचकर क्या बन गया देसी पिल्ला बाहर घूमते रहे दुनिया भर से गली गलौज और बदतमीजी पालतू नहीं बन्ना है समाज बाहुबली के सामने झुक नहीं जाना है जितनी विनम्रता सच्चाई के सामने हनी चाहिए उतनी चाहिए सच के सामने सर उठे नहीं और माया के सामने सर झुकी जो संस्कारी लोग हैं उन्हें बदतमीजी आनी चाहिए आचार्य जी आप तो गलियों के खिलाफ थे निर्भर करता है ना वेदांत क्या बोलना है पर होम जो बहुत ज्यादा बोलते हैं उनसे बोलना हूं चुप गली दिया जा रहा है चुप कर और जो संस्कारों की बेड़ियां के चलते मई नहीं खोल पाते आवाज नहीं ऊंची कर पाते उनसे मैं कहूंगा आवाज भी ऊंची करो और गली देना इसी को प्रेम में मौन हो जाना एक बात होती है और डर की चुप्पी बिल्कुल दूसरी बात मुझे बड़ा मजा आता है देखने में लोग कितने तमीजेदार हो जाते हैं एयरपोर्ट पर फ्लाइट के अंदर बड़ी कंपनियां में बड़े अफसर के सामने नेताओं के सामने बड़े रेस्तरां में कितने तमीजदार हो जाते हैं जहां बदतमीजी करनी चाहिए वहां तुम तमीजजर हो जाते हो और जहां विनम्रता आनी चाहिए जहां मृदभाषण आना चाहिए वहां तुम तेवर दिखाई हो कोई सब्जी वाली बैठी होगी उससे लगे हुए बहस करने में की ₹5 बाज जाए उसको उल्टा पुल्टा भी बोल रहे हैं ऑटो वाले से बदतमीजी कर रहे हैं वहां पर और अत्याचारी के साथ एकदम ग्राम समाज उल्टे सिद्धांत पर चला है समाज और अध्यात्म की इसीलिए बंटी नहीं आपस में समाज कहता है ऊंचे लोगों से रिश्ता बनाकर रखो ना नेटवर्किंग अध्यात्म कहता है ऊंचा तो सिर्फ एक हमारी नेटवर्किंग तो इस के साथ होगी और बाकी जितने दुनिया में अपने आप को ऊंचा कहते हैं मेरी जूती पर जिसको सम्मान बाकी सब हैं प्राचार्य [संगीत]
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